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HBSE Class 12 Political Science Half Yearly Assessment – September 2026 Solution

Class 12 Political Science Half Yearly Assessment – September 2026 Solution

HBSE Class 12 Political Science

Half Yearly Assessment – September 2026

Table of Contents

Complete Question-wise Solution | 40 Marks


Section A – वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1 से 10 — प्रत्येक 1 अंक

प्रश्न 1. भारत में कौन-सा भाषायी फॉर्मूला लागू किया गया है?

उत्तर: त्रिभाषा सूत्र (Three-Language Formula)

व्याख्या: भारत में भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा के क्षेत्र में त्रिभाषा सूत्र अपनाया गया।


प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-से दल का आधार साम्प्रदायिकता माना जाता है?

विकल्प:

  • (क) जनता दल
  • (ख) अकाली दल
  • (ग) भारतीय जनता पार्टी
  • (घ) कांग्रेस (आई)

उत्तर: (ख) अकाली दल


प्रश्न 3. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) का गठन कब हुआ?

विकल्प:

  • (क) 1999
  • (ख) 1998
  • (ग) 2004
  • (घ) 2009

उत्तर: (ग) 2004


प्रश्न 4. भारत में ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का आह्वान किस नेता ने किया?

उत्तर: जयप्रकाश नारायण (J.P. Narayan)

व्याख्या: जयप्रकाश नारायण ने 1970 के दशक में व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन के लिए ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया। यह प्रश्न paper के page 2 पर दिया गया है।


प्रश्न 5. भारत में मंडल आयोग की सिफारिशों को किस वर्ष लागू किया गया?

उत्तर: 1990

ध्यान रखें: मंडल आयोग की स्थापना 1979 में हुई और इसकी सिफारिशें 1980 में प्रस्तुत हुईं, जबकि उन्हें लागू करने की घोषणा 1990 में हुई।


प्रश्न 6. पंडित नेहरू की मृत्यु के बाद भारत के प्रधानमंत्री कौन बने?

उत्तर: लाल बहादुर शास्त्री


प्रश्न 7. दल-बदल विरोधी अधिनियम (Anti-Defection Act) किस वर्ष पारित हुआ?

उत्तर: 1985

अतिरिक्त जानकारी: यह 52वें संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान में जोड़ा गया।


प्रश्न 8. भारतीय संसद पर आतंकवादी हमला कब हुआ?

उत्तर: 13 दिसम्बर 2001


प्रश्न 9. भारतीय जनसंघ के संस्थापक कौन थे?

उत्तर: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी


प्रश्न 10. Assertion–Reason

कथन (A): स्वतंत्रता के समय हैदराबाद सबसे बड़ी रियासत थी।

कारण (R): यह मुस्लिम शासक वाला एक हिन्दू बहुसंख्यक राज्य था।

उत्तर: (ख)
कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता।

क्यों? हैदराबाद की विशालता का संबंध उसके बड़े क्षेत्रफल और स्थिति से था; केवल हिन्दू बहुसंख्यक और मुस्लिम शासक होने से यह स्पष्ट नहीं होता कि वह सबसे बड़ी रियासत क्यों थी।

Page 2–3 में यह Assertion–Reason प्रश्न स्पष्ट रूप से दिया गया है।


Section B – Very Short Answer

प्रश्न 11 से 14 — प्रत्येक 2 अंक

प्रश्न 11. गठबंधन सरकार की कोई दो विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:

गठबंधन सरकार वह सरकार है जिसमें दो या दो से अधिक राजनीतिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं।

दो प्रमुख विशेषताएँ:

  1. किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर गठबंधन सरकार बन सकती है।
  2. गठबंधन में शामिल दल साझा कार्यक्रम और नीतियों के आधार पर सरकार चलाते हैं।

प्रश्न 12. भारत की दलीय व्यवस्था की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  1. भारत में बहुदलीय दलीय व्यवस्था है।
  2. भारत में राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय दोनों प्रकार के राजनीतिक दल सक्रिय हैं।

अन्य विशेषता: भारत में समय-समय पर गठबंधन सरकारों का भी निर्माण हुआ है।


प्रश्न 13. विकास का पूँजीवादी मॉडल क्या है?

उत्तर:

विकास का पूँजीवादी मॉडल ऐसी आर्थिक व्यवस्था है जिसमें निजी स्वामित्व, बाजार की शक्तियों और लाभ कमाने को प्रमुख महत्व दिया जाता है।

इसमें—

  • निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
  • बाजार मांग और आपूर्ति के आधार पर आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करता है।
  • प्रतियोगिता और निजी निवेश को प्रोत्साहन दिया जाता है।

प्रश्न 14. सोवियत प्रणाली की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  1. समाजवादी अर्थव्यवस्था: उत्पादन के प्रमुख साधनों पर राज्य का नियंत्रण था।
  2. एक-दलीय राजनीतिक व्यवस्था: कम्युनिस्ट पार्टी का राजनीतिक व्यवस्था पर प्रमुख नियंत्रण था।

अन्य विशेषता: सोवियत संघ में योजनाबद्ध आर्थिक विकास पर विशेष बल दिया जाता था।

Page 3–4 में प्रश्न 11–14 इसी क्रम में दिए गए हैं।


Section C – Short Answer

प्रश्न 15 से 18 — प्रत्येक 3 अंक

प्रश्न 15. भारत में क्षेत्रवाद के कोई तीन परिणाम लिखिए।

उत्तर:

भारत में क्षेत्रवाद के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित हैं—

1. क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का विकास

क्षेत्रीय हितों को लेकर अनेक राजनीतिक दलों का उदय हुआ। इन दलों ने अपने-अपने राज्यों के हितों को राष्ट्रीय राजनीति में उठाया।

2. नए राज्यों की माँग

भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर अलग राज्यों की माँगें उठीं। इसके परिणामस्वरूप कई नए राज्यों का गठन हुआ।

3. लोकतांत्रिक राजनीति में क्षेत्रीय हितों की भागीदारी

क्षेत्रीय मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति में अधिक महत्व मिला और केंद्र सरकार को विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं पर ध्यान देना पड़ा।


प्रश्न 16. कांग्रेस को छतरी संगठन (Umbrella Organisation) क्यों कहा जाता है?

उत्तर:

कांग्रेस को छतरी संगठन इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन और उसके बाद कांग्रेस के भीतर विभिन्न विचारधाराओं, वर्गों, समुदायों और राजनीतिक समूहों के लोग शामिल थे।

इसके प्रमुख कारण—

  1. कांग्रेस में विभिन्न विचारधाराओं के लोग शामिल थे।
  2. इसमें विभिन्न धर्मों, जातियों, क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व था।
  3. कांग्रेस ने अलग-अलग हितों और विचारों को एक व्यापक राजनीतिक मंच प्रदान किया।

इस प्रकार कांग्रेस एक ऐसी व्यापक राजनीतिक छतरी थी जिसके अंतर्गत अनेक प्रकार के समूह और विचार शामिल थे।


प्रश्न 17. वचनबद्ध नौकरशाही (Committed Bureaucracy) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:

वचनबद्ध नौकरशाही से आशय ऐसी नौकरशाही से है जो सरकार की विचारधारा, नीतियों और कार्यक्रमों के प्रति विशेष रूप से प्रतिबद्ध होकर कार्य करे।

इस अवधारणा में—

  1. प्रशासन से सरकार की नीतियों को सक्रिय रूप से लागू करने की अपेक्षा की जाती है।
  2. नौकरशाही को सरकार के सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रमों के प्रति सहयोगी माना जाता है।
  3. इसका उद्देश्य प्रशासन को सरकार की विकास एवं परिवर्तनकारी नीतियों के अनुरूप बनाना था।

Exam Point: सामान्य लोकतांत्रिक व्यवस्था में नौकरशाही से राजनीतिक निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है।


प्रश्न 18. भारत में नई आर्थिक नीति की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

भारत में नई आर्थिक नीति 1991 में लागू की गई। इसकी प्रमुख विशेषताएँ थीं—

1. उदारीकरण (Liberalisation)

आर्थिक गतिविधियों पर सरकारी नियंत्रण और प्रतिबंधों को कम किया गया।

2. निजीकरण (Privatisation)

अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ावा दिया गया।

3. वैश्वीकरण (Globalisation)

भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था से अधिक जोड़ने तथा विदेशी निवेश और व्यापार को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।

Page 5 में प्रश्न 17 और 18 तथा उनके marks स्पष्ट दिखाई देते हैं।


Section D – Long Answer

प्रश्न 19 और 20 — प्रत्येक 5 अंक

प्रश्न 19. भारत विभाजन के प्रमुख कारणों का वर्णन करें।

उत्तर:

भारत का विभाजन 1947 में हुआ। इसके पीछे कई राजनीतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक कारण थे।

1. साम्प्रदायिक राजनीति का विकास

हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच राजनीतिक अलगाव बढ़ता गया।

2. मुस्लिम लीग की भूमिका

मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए अलग राजनीतिक पहचान और अंततः अलग राष्ट्र की माँग को आगे बढ़ाया।

3. द्वि-राष्ट्र सिद्धांत

द्वि-राष्ट्र सिद्धांत के अनुसार हिन्दू और मुस्लिम दो अलग राष्ट्र हैं। इस विचार ने विभाजन की माँग को बल दिया।

4. कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक मतभेद

दोनों संगठनों के बीच सत्ता के बँटवारे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद बढ़ते गए।

5. ब्रिटिश नीति

ब्रिटिश शासन की फूट डालो और राज करो जैसी नीतियों ने साम्प्रदायिक विभाजन को बढ़ाने में भूमिका निभाई।

निष्कर्ष

इन सभी राजनीतिक और साम्प्रदायिक परिस्थितियों के परिणामस्वरूप 1947 में भारत का विभाजन हुआ।

Paper में Alternative:
“राष्ट्र निर्माण के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपायों का वर्णन करें।”

Alternative Answer

राष्ट्र निर्माण के लिए निम्नलिखित उपाय आवश्यक थे—

  1. राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करना।
  2. भाषायी और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना।
  3. क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना।
  4. लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना।
  5. सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर देना।

प्रश्न 20. भारत की विदेश नीति को निर्धारित करने वाले कारकों का वर्णन करें।

उत्तर:

भारत की विदेश नीति अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से प्रभावित होती है।

1. राष्ट्रीय हित

भारत की विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य देश की सुरक्षा, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।

2. भौगोलिक स्थिति

भारत की भौगोलिक स्थिति—विशेषकर एशिया में इसका स्थान और पड़ोसी देशों के साथ सीमाएँ—विदेश नीति को प्रभावित करती हैं।

3. राष्ट्रीय सुरक्षा

सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और पड़ोसी देशों के साथ संबंध विदेश नीति के महत्वपूर्ण निर्धारक हैं।

4. आर्थिक विकास

भारत को व्यापार, निवेश, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होती है।

5. ऐतिहासिक अनुभव

औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के अनुभव ने भारत की विदेश नीति में स्वतंत्र निर्णय और उपनिवेशवाद-विरोध को महत्व दिया।

6. विश्व शांति

भारत ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और विश्व शांति का समर्थन किया है।

निष्कर्ष:
भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हित, सुरक्षा, आर्थिक आवश्यकताओं, भौगोलिक स्थिति और विश्व परिस्थितियों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है।


प्रश्न 20 — Alternative

भारत द्वारा अपनाई गई गुटनिरपेक्ष नीति की विशेषताओं का वर्णन करें।

उत्तर:

  1. स्वतंत्र विदेश नीति: भारत ने किसी एक शक्ति गुट के निर्देशों का पालन करने के बजाय स्वतंत्र निर्णय लेने पर बल दिया।
  2. शक्ति गुटों से दूरी: शीत युद्ध के दौरान भारत अमेरिका या सोवियत गुट में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुआ।
  3. विश्व शांति का समर्थन: भारत ने युद्ध के बजाय शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया।
  4. उपनिवेशवाद का विरोध: भारत ने एशिया और अफ्रीका के स्वतंत्रता आंदोलनों का समर्थन किया।
  5. राष्ट्रीय हितों की रक्षा: गुटनिरपेक्षता के माध्यम से भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार विदेश नीति बनाने का प्रयास किया।

Page 7 पर प्रश्न 20 और उसका alternative “भारत द्वारा गुट निरपेक्ष नीति की विशेषताओं का वर्णन करें” दिया गया है।


📌 One-Page Answer Key

प्रश्न उत्तर
1 त्रिभाषा सूत्र
2 अकाली दल
3 2004
4 जयप्रकाश नारायण
5 1990
6 लाल बहादुर शास्त्री
7 1985
8 13 दिसम्बर 2001
9 डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
10 (B) दोनों सही, लेकिन R सही व्याख्या नहीं
11 गठबंधन सरकार की विशेषताएँ
12 भारतीय दलीय व्यवस्था की विशेषताएँ
13 पूँजीवादी विकास मॉडल
14 सोवियत प्रणाली की विशेषताएँ
15 क्षेत्रवाद के तीन परिणाम
16 कांग्रेस = छतरी संगठन
17 वचनबद्ध नौकरशाही
18 उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण
19 भारत विभाजन के कारण
20 भारत की विदेश नीति के निर्धारक

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